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Showing posts from April, 2017
मूर्खता का सौन्दर्यशास्त्रीय विवेचन बनाम बलम परदेशी जायका!! गप्प  आज पूरे एक साल बाद रामाधार से भेंट हुई ।   रामाधार बहुत गुस्से में था । कुछ दिन पहले ही मुझे पता चला कि रामाधार को ब्लड प्रेशर की   बीमारी हो गयी है। मैंने उससे कहा था कि अकादमिक जगत को दिल से मत लगाओ , दिल के मरीज हो जाओगे।   लेकिन बददिमाग सुनता ही नहीं किसी की।   अपनी ही धुन में जीता है , अपने मन की करता है। उसे तनिक भी परवाह नहीं कि आगे क्या होगा ?  जब भी मैं उसे डांटता हूँ तो वो कहता है, ‘एक ही जिंदगी तो मिली है घुट-घुट के नहीं जियूँगा , समझौतापरस्ती मुझसे नहीं होगी दोस्त।’ आज उसका पारा गरम था। गुस्से में आया और परिचय 2017 का अंक मेरे सामने फेंकते हुए बोला, ‘देखो इसमें क्या-क्या लिखा है शुक्ला जी ने’ ! मैं जब तक कुछ समझता रामाधार ने बोलना शुरू किया, ‘ इनकी आदत   बहुत खराब है। जैसे ही कोई पदमुक्त होता है या पद से हटाया जाता है , वैसे ही ये हज़रत उसको सार्वजनिक रूप से गरियाना शुरू करते हैं। जैसे विनय सिंह के पद से हटाए जाने पर इन्होनें रविशंकर भैया की श्रद्धांजलि की आड़ में उन...