‘देह ही देश’ भग्न देह और विदीर्ण मन का कोलाज आज जब पूरा विश्व साम्राज्यवादी-उग्र राष्ट्रवादी प्रवृत्तियों और धार्मिक-सांप्रदायिक हिंसा की कार्रवाइयों के साथ-साथ विश्वयुद्ध के ख़तरे की ओर लगातार बढ़ रहा है ; ऐसे समय में युद्ध एवं युद्धनीति की क्रूर सच्चाई बयाँ करती गरिमा श्रीवास्तव की क्रोएशिया प्रवास-डायरी ‘देह ही देश’ वैश्विक साम्राज्यवादी साजिशों एवं षड्यंत्रों से संचालित फासीवादी राष्ट्रवाद के ख़तरों की तरफ इशारा करती है। यह किताब ‘वृहद स्वच्छ सर्बिया’ के नाम पर बोस्निया, हर्जेगोविना, क्रोएशिया की निर्दोष और मासूम जनता के साथ किये जाने वाले बर्बरतम अत्याचारों का ज्वलंत दस्तावेज है। ‘ देह ही देश ’ में सर्ब सैनिक तथा सर्ब प्रतिवेशियों द्वारा स्त्रियों के सामूहिक बलात्कार, एथनिक क्लींजिंग, धार्मिक जेनोसाइट के ब्यौरे गहरी संवेदनात्मक संलग्नता के साथ प्रस्तुत किए गए हैं। किताब में आँकड़े, रिपोर्ट, इंटरव्यू, बातचीत के माध्यम से बताया गया है कि 1991-95 के बीच ‘ग्रेटर सर्बिया’ के नाम पर सर्बियाई जनता के मन में उग्र राष्ट्रवाद कूट-कूटकर भर दिया गया और उसके बाद शुरू हुआ स्त्रियों के ...