कि मैं दुनिया की सबसे हसीन औरत के सामने खड़ा हूँ । विहाग वैभव काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के गंभीर अध्येता और मधुबन गोष्ठी के महत्त्वपूर्ण रचनाकार हैं। विहाग सोशल मीडिया पर कविताओं के माध्यम से अपने विचार लगातार साझा करते रहते हैं। विहाग की कुछ कविताओं को मैं एक साथ आपके सामने रख रहा हूँ। अपने समय और समाज से मुठभेड़ करता हुआ यह युवा रचनाकार अपनी बेबाकी और साफगोई के लिए जाना जाता है। विहाग के संपूर्ण व्यक्तित्व को आप उनकी कविताओं में देख सकते हैं। इनकी कविताओं में आक्रोश और गुस्से का स्वर देखने को मिलेगा। कई बार इनका आक्रोश कविताओं को कुछ जगहों पर कमजोर भी करता है। इसके बावजूद विहाग की कविताएं इस आधे-अधूरे समय और समाज को बखूबी व्यक्त करती है, साथ ही ये कवितायें इस फासीवादी समय से जगह-जगह पर दो दो हाथ करती हुई दिखती है। बहरहाल आइये हम इस युवा कवि की कविताओं से को पढ़ते हैं ---- ...