Skip to main content

Posts

Showing posts from November, 2018
आद्य नायिका : इतिहास के तिलस्म में कैद वर्तमान ‘ जब इतिहास का शव आपके कंधे पर सवार हो और आप उसे उठाकर फेंक भी नहीं सकते ’ तब आप इस स्थिति में वर्तमान को समझने के लिए इतिहास एवं इतिहासबोध का सर्जनात्मक उपयोग करते हैं । इसी सर्जनात्मकता का सहारा लेकर युवा कवि अरुणाभ सौरभ ने ‘आद्य नायिका’ शीर्षक से लंबी कविता लिखी है। अरुणाभ ने अपनी लंबी कविता ‘आद्य नायिका’ में इतिहास, मिथक और अपने समकाल को एक विशिष्ट रचनात्मक आयाम दिया है । यह लंबी कविता मौर्य साम्राज्य के पतन एवं शुंग वंश की स्थापना के साथ ब्राह्मणों द्वारा सत्ता-वर्चस्व की नीति और षड्यंत्रों के सहारे हो रहे बौद्धों और बौद्धिकों के दमन को केंद्र में रखकर लिखी गयी है । आज जब हमारी राजनीति इतिहास के गर्भगृह में पहुंचकर परिपक्क हो रहे भ्रूणों के साथ छेड़छाड़ कर रही है तब राजनीति के नए यथार्थ और नए चरित्र को पकड़ने के लिए कवि को इतिहास में लौटना पड़ता है । ऐतिहासिकता से संपृक्त यह कविता हमारे समकाल, समकालीन परिस्थितियों एवं प्रतिकूल वातावरण को व्यक्त करने में सक्षम है। पटना के नजदीक दीदारगंज में गंगा नदी के किनारे सन् 1917 ई. में ...