Skip to main content

Posts

Showing posts from February, 2017
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में शोधरत शैलेन्द्र कुमार शुक्ल साहित्य में अपने खास तेवर और पक्षधरता के लिए जाने जाते हैं। आप इनके लेखन में इनका तेवर और इनकी पक्षधरता देख सकते हैं। “यह समय बहुत ही खतरनाक दौर से गुजर रहा है। जब हत्यारे हत्याएं कर रहे हैं और राजनीतिक भक्त मदांध हो कर हत्यारों की पूजा में लगे हुए हैं। वह अपने सारे तर्कों के साथ इन हत्यारों की आरती उतारते रहते हैं जब तक उनकी खुद हत्या न हो जाए। ऐसे ही हत्यारों को अखाड़ा बनी इस समय की भारतीय राजनीति, भूमंडलीकरण , बाजारवाद , उत्तरधुनिकता की आंधियों में खुद को सुरक्षित पाती है। उसे जनता से खतरा ही महसूस नहीं होता। उसे लगता है जनता गहरे नशे में सो रही है। बौद्धिक , कवि , रचनाकर इस जनता को जगाना चाहते हैं , तो उनकी हत्या कर दी जाती है। और आज के राजनीतिक भक्त बुद्धिजीवियों को गरियाने में अपनी भलाई समझ रहे हैं।"(फेसबुक वाल से) शैलेन्द्र हिंदी और तुलनात्मक साहित्य विभाग , वर्धा के गंभीर अध्येता हैं। अपने समय , समाज , राजनीति और साहित्य पर सुचिंतित समझ रखने वाले शैलेन्द्र के लेखन में आप मौजूदा संघर्ष की आहट...
मधुबन गोष्ठी पराग पावन की कुछ कविताएं साझा कर रहा हूँ। पराग अभी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में परास्नातक पाठ्यक्रम में अध्ययनरत हैं। स्नातक की शिक्षा इन्होने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रहण की। कविता और कवि-कर्म के प्रति बेहद ही सचेत हैं पराग ; स्नातक के दौरान ही इन्होनें इस क्षेत्र में समझ रखने वाले अपने कुछ जिज्ञासु मित्रों को एकजुट किया और इस संदर्भ में चर्चा-परिचर्चा की शुरुआत की। पराग और इनके सारे मित्र हर रविवार को मधुबन (काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संगीत मंच कला संकाय के बगल का उद्यान) में काव्य-गोष्ठी का आयोजन करते थे , जो अभी भी मुसलसल जारी है। इस गोष्ठी में कविता से सम्बन्धित समझ और रूचि रखने वाले छात्र आते हैं और अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ करते हैं , साथ ही कविता की बारीकियों पर भी चर्चा होती है। जिस दौर में हिंदी कविता बिना अकादमिक प्रचार-प्रसार और बिना दरबारी आलोचना के एक कदम चलने में भी हांफने लगती है उसी दौर में ‘मधुबन गोष्ठी’ के सारे साथी कविता रच रहे होते हैं। एक रविवार आमंत्रण मिलने पर मैं भी घूमते टहलते मधुबन पहुँचा , वहां कई युवा साथियों से भेंट हुई...