महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में शोधरत शैलेन्द्र कुमार शुक्ल साहित्य में अपने खास तेवर और पक्षधरता के लिए जाने जाते हैं। आप इनके लेखन में इनका तेवर और इनकी पक्षधरता देख सकते हैं। “यह समय बहुत ही खतरनाक दौर से गुजर रहा है। जब हत्यारे हत्याएं कर रहे हैं और राजनीतिक भक्त मदांध हो कर हत्यारों की पूजा में लगे हुए हैं। वह अपने सारे तर्कों के साथ इन हत्यारों की आरती उतारते रहते हैं जब तक उनकी खुद हत्या न हो जाए। ऐसे ही हत्यारों को अखाड़ा बनी इस समय की भारतीय राजनीति, भूमंडलीकरण , बाजारवाद , उत्तरधुनिकता की आंधियों में खुद को सुरक्षित पाती है। उसे जनता से खतरा ही महसूस नहीं होता। उसे लगता है जनता गहरे नशे में सो रही है। बौद्धिक , कवि , रचनाकर इस जनता को जगाना चाहते हैं , तो उनकी हत्या कर दी जाती है। और आज के राजनीतिक भक्त बुद्धिजीवियों को गरियाने में अपनी भलाई समझ रहे हैं।"(फेसबुक वाल से) शैलेन्द्र हिंदी और तुलनात्मक साहित्य विभाग , वर्धा के गंभीर अध्येता हैं। अपने समय , समाज , राजनीति और साहित्य पर सुचिंतित समझ रखने वाले शैलेन्द्र के लेखन में आप मौजूदा संघर्ष की आहट...